भारतीय शादी में क्या खास है और क्या अलग

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भारत में कई राज्य होने के कारण अनेक विविधताएं देखने को मिलती हैं। यहां तरह-तरह के लोग विभिन्न व्यंजन, पोशाक, रीति-रिवाज़ों, और अपने अलग अंदाज़ के साथ रहते है। यही बात भारत को ख़ास भी बनाती है।

इस देश में जितनी विविधताएं है उतनी ही यहां के लोगों में एकता भी है। यहां परंपराओं को निभाने का हुनर भी लोगो में खूब है। भारत के लोग धर्म और प्रथाओं का कठोर पालन भी करते हैं। यहां के अलग-अलग क्षेत्र में अलग-अलग तरीके से होने वाले विवाह समारोह इसका एक अच्छा उदाहरण हैं।

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क्या खास है भारतीय शादी में 

शादी जिन्दगी का सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम होता है और सब चाहते भी हैं कि इसे पूरे रिवाज़ों के साथ पूर्ण किया जाएं। भारत ही एक ऐसा देश है जहां शादी को पूजा की तरह माना जाता है और ढेरों रस्में भी की जाती है।

अगर भारतीय शादियों को देखा जाए तो कुछ ख़ास रस्में है जो शादी के बन्धन मे बधने वाले जोड़े को निभानी होती है।

तिलक से लेकर विदाई तक ऐसी कईं महत्पूर्ण रस्में भारत देश की शादियों का हिस्सा होती हैं। शादी से दो दिन पहले संगीत समारोह होता है जो कि सिर्फ गाने और नाचने के लिए समर्पित होता है। दोनो परिवार के सदस्य गीत गाकर अपनी खुशी जाहिर करते है।

मेहंदी समारोह का आयोजन शादी से एक दिन पहले दुल्हन के हाथ-पैरों पर सुन्दर मेंहदी लगाने के लिए किया जाता है। शादी के दिन बारात (दुल्हें के परिवार का आगमन) का बेसब्री से इंतजार रहता है। और उसके आने के बाद बाकी जरूरी और अहम रस्में भी पूरी की जाती हैं।

लड़का-लड़का फेरे लेकर एक दूसरे के साथ जीवन भर रहने और साथ निभाने की कसमें खाते हैं।

लड़की की बहनें जो कि दुलहें की सालियाँ होती हैं, लड़के के जूते चुराकर अपने लिए तोहफे व शगुन मांगती हैं। इस रस्म को भारतीय रिवाज़ों में जूते चुराने की रस्म कहा जाता है।

यह सच है कि भारतीय धर्म में होने वाली शादियाँ बहुत विशिष्ट होती है परन्तु साथ ही इनमे उतना ही रोमांच भी होता है। जो सिर्फ इनमे शामिल होने पर ही पता चल सकता है।

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