5 मिनट में टॉयलेट का पानी बनेगा पीने के लायक!

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पने माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स को पोलियो के खिलाफ अभियानों में भाग लेते या बिहार के गावों को गोद लेते तो सुना होगा। अब उन्होंने लोगों के लिए साफ पानी बनाने का बीड़ा उठाया है।

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उन्होंने अमेरिका के कई विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों को टॉयलेट का पानी पीने लायक बनाने का चैलेंज दिया। वैज्ञानिकों ने उनकी चुनौती स्वीकारते हुए ऐसा ओमिनी प्रोसेसर बनाया है जो टॉयलेट के गंदे पानी को पांच मिनट में पीने लायक बना देता है। इस तकनीक को दुनिया के किसी भी देश में इस्तेमाल किया जा सकता है।

यह ओमिनी प्रोसेसर 250 किलोवट ऊर्जा का इस्तेमाल कर एक लाख लोगों के मलमूत्र से एक दिन में 86 हजार लीटर पीने का पानी तैयार कर सकता है। ओमिनी प्रोसेसर गंदे पानी को नदियों में बहने से रोकेगा। बिल गेट्स ने इस पूरे प्रोजेक्ट की फंडिंग की है। ‘ओमनीप्रोसेसर’ नाम के इस प्लांट की संरचना और निर्माण सिऐटल की कंपनी, बिल गेट्स और मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन संयुक्त रूप से कर रही है।

प्लांट में मल-मूत्र से बने पानी को पीने के बाद बिल गेट्स ने इसे पूरी तरह से ‘प्योर’ बताया। अपने ब्लॉग पोस्ट में बिल गेट्स ने कहा, ‘इसका स्वाद ठीक उसी तरह है, जैसे किसी बोतलबंद पानी का होता है। यह कैसे बड़ी सफाई और मानकों का पालन करके बन रहा है, यह जानने के बाद इसे खुशी-खुशी रोज पीने को तैयार हूं। यह सुरक्षित है।’

ऐसे बनेगा पीने का पानी:

1- गंदगी मशीन से कन्वेयर बेल्ट के जरिए ड्रायर में जाती है। यहां ऊंचे तापमान पर पानी को गंदगी से अलग करते हैं।

2- ड्रायर में मल-मूत्र का पानी भाप में बदलकर पाइप के जरिए कूलिंग ट‌्यूब में चला जाता है। बाकी गंदगी सूख जाती है।

3- सूखी हुई गंदगी भट‌्टी में ऊंचे तापमान पर जलाते हैं। इससे टेम्प्रेचर-हाई स्पीड भाप बनती है जो सीधे स्टीम इंजन में जाती है।

4 – स्टीम इंजन से जुड़ा जेनरेटर चालू हो जाता है और बिजली बनाता है। बची राख कहीं भी इस्तेमाल हो सकती है।

5 – दूसरे चरण में बनी भाप, क्लीनिंग सिस्टम की पाइप्स से तब तक गुजारी जाती है जब तक स्वच्छ पानी नहीं मिल जाता।

क्या है खास:

01 लाख लोगों के मल-मूत्र से रोज बन सकेगा 86000 लीटर पीने योग्य पानी।

250 किलो वॉट बिजली उत्पन्न होगी इस प्रक्रिया में।

1000 डिग्री सेल्सियस के ऊंचे तापमान पर जलाते हैं अपशिष्ट ताकि बदबू निकल जाए।

क्यों है ऐसे प्लांट की जरूरत:

हर साल गंदे पानी और अन्य गंदगी से होने वाली बीमारियों से सात लाख बच्चों की मौत होती है।

दुनिया में करीब दो अरब लोगों (पूरे विश्व की कुल जनसंख्या के 35 प्रतिशत) को साफ-सफाई की बेहतर सुविधा न होने से गंदा पानी पीना पड़ता है।

भूगर्भ जल का स्तर पूरी दुनिया में गिर रहा है। पूरी दुनिया में जल संरक्षण के तरीकों पर बड़े शोध हो रहे हैं।

कहा तो जा रहा है कि अगर हालात काबू में न आए तो तीसरा विश्व युद्ध पानी के लिए होगा।

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