रेडियोएक्टिव स्याही के प्रयोग के कारण मिल रही है इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के छापो में 100 फीसदी कामयाबी, जानिए क्या है रेडियोएक्टिव स्याही

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चलिए आपको बताते है, नोट में कोई चिप नहीं बल्कि इस प्रकार के रेडियो एक्टिव इंक का प्रयोग है | रेडियोएक्टिव स्याही का प्रयोग विकसित देशो में पहले से बतोर इंडीकेटर किया जाता रहा है |

दरअसल P32 फास्फोरस का रेडियोएक्टिव स्याही आईसोटोप है जिसके नाभिक में 15 प्रोटोन और 17 न्यूट्रॉन होते है और यह रेडियोएक्टिव स्याही में नयूनं मात्रा में प्रयोग किया जाता है |

यह रेडियोएक्टिव वार्निंग टेप की तरह प्रयोग होता है जिस से एक ही जगह पर मोजूद लिमिट से अधिक होने पर इंडीकेटर के तोर पर नोटों की मोज़ूदगी को यह सूचित करता है |जिस से भरी मात्रा में लोग इससे युक्त नगदी का संग्रह करते ही पकडे जा रहे है |

नए नोट भी लोग छुपा के वही रख रहे है जहा सोना चांदी और अन्य कमाई के नोट है ऐसे में जाँच के दोरान छिप कुछ नहीं रहा है | 2 हजार के नोट के साथ साथ 500 के नोट म भी इसी इंक का प्रयोग किया गया है |

इसे आप संकल्पना कहे या जो भी मगर मैं सिर्फ आप लोगो के हित में लिख रहा हु क्योकि आप इमानदार बने वरना नई नोट तो आपको इमानदार बना ही देगी |जिसे शक दूर करना हो वो गूगल में रेडियोएक्टिव इंक खोज सकता है अन्यथा भ्रम पाले रहना भी बहुतो को जरुरी है |

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